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Chalisha-hindi

Hanuman Chalisa – Hindi

Goswami Tulsidas
Feb 25, 2026
(0)

श्री हनुमान चालीसा


दोहा


श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥


बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार ।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ॥


चौपाई


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥


राम दूत अतुलित बल धामा ।

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥


महाबीर विक्रम बजरंगी ।

कुमति निवार सुमति के संगी ॥३॥


कंचन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुंडल कुँचित केसा ॥४॥


हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे ।

काँधे मूँज जनेऊ साजे ॥५॥


शंकर सुवन केसरी नंदन ।

तेज प्रताप महा जगवंदन ॥६॥


विद्यावान गुनी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ॥७॥


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मनबसिया ॥८॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा ।

विकट रूप धरि लंक जरावा ॥९॥


भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

रामचंद्र के काज सवाँरे ॥१०॥


लाय सजीवन लखन जियाए ।

श्री रघुबीर हरषि उर लाए ॥११॥


रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई ॥१२॥


सहस बदन तुम्हरो जस गावै ।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावै ॥१३॥


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥


तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा ।

राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥१६॥


तुम्हरो मंत्र विभीषण माना ।

लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥१७॥


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू ।

लिल्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही ।

जलधि लाँघि गए अचरज नाही ॥१९॥


दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥२०॥


राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥


सब सुख लहैं तुम्हारी सरना ।

तुम रक्षक काहु को डरना ॥२२॥


आपन तेज सम्हारो आपै ।

तीनों लोक हाँक तै काँपै ॥२३॥


भूत पिशाच निकट नहि आवै ।

महावीर जब नाम सुनावै ॥२४॥


नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥२५॥


संकट तै हनुमान छुड़ावै ।

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ॥२६॥


सब पर राम तपस्वी राजा ।

तिनके काज सकल तुम साजा ॥२७॥


और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥


चारों जुग परताप तुम्हारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥


साधु संत के तुम रखवारे ।

असुर निकंदन राम दुलारे ॥३०॥


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।

अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥


राम रसायन तुम्हरे पासा ।

सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥


तुम्हरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥


अंतकाल रघुवरपुर जाई ।

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥


और देवता चित्त न धरई ।

हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥३५॥


संकट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥


जै जै जै हनुमान गुसाईं ।

कृपा करहु गुरु देव की नाईं ॥३७॥


जो सत बार पाठ कर कोई ।

छूटहि बंदि महा सुख होई ॥३८॥


जो यह पढ़े हनुमान चालीसा ।

होय सिद्ध साखी गौरीसा ॥३९॥


तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥


दोहा


पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

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